चाँदनी रात
चाँद पूरा है आसमा में, और चाँदनी बेह रही खिड़की से आए झोके के साथ।
आप बोल तो रही हो नहीं, मगर आप के आवाज़ सुन रहें हैं हम।।
कहाँ चाँद है, और कहाँ की ज़मी
वहां आप हैं, और यहाँ हम कहीं।
मानतें है चाँद को आपसे तुलना है न सही, मगर क्या करे दीवाने है आपके ऐ हसी,
चाँद से भी प्यारा लगती है आप जब हँसी।।
आज की रात आप को हमारे आँखें देख नहीं सके तो क्या हुआ,
हमारे यादों में आप की तस्वीर को देखते नींद की डोली में सो जाएँगे हम।
चाँद पूरा है आसमा में, और चाँदनी बेह रही खिड़की से आए झोके के साथ।
आप बोल तो रही हो नहीं, मगर आप के आवाज़ सुन रहें हैं हम।।
कहाँ चाँद है, और कहाँ की ज़मी
वहां आप हैं, और यहाँ हम कहीं।
मानतें है चाँद को आपसे तुलना है न सही, मगर क्या करे दीवाने है आपके ऐ हसी,
चाँद से भी प्यारा लगती है आप जब हँसी।।
आज की रात आप को हमारे आँखें देख नहीं सके तो क्या हुआ,
हमारे यादों में आप की तस्वीर को देखते नींद की डोली में सो जाएँगे हम।
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